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शुक्र के योग -संगीता राठी
1. यदि शुक्र अश्विनी नक्षत्र में स्थित होकर लग्न में स्थित हों तथा उन पर तीन ग्रहों की दृष्टि हो तो ऎसा व्यक्ति प्रबल राजा होता है, जो अपने शत्रुओं को जीतता है।
2. यदि लग्नेश बलवान होकर शुक्र के साथ द्वितीय स्थान में स्थित हो तथा द्वितीय भाव में स्थित राशि का राशीश, लग्नेश या शुक्र की शत्रु राशि या नीच राशि ना हो तो ऎसा जातक राजा होता है।
3. शुक्र, बृहस्पति और शनि, मीन राशि में हों, चन्द्रमा पूर्ण हों (पूर्णिमा का) और अपनी उच्चा राशि में हों, सूर्य को मंगल देखते हों और मेष लग्न हो तो ऎसा व्यक्ति बहुत ब़डा राजा होता है। आज के परिप्रेक्ष्य मेें ऎसा राजयोग उच्चा प्रशासनिक अधिकारी, राजदूत, सेना के उच्चााधिकारी और राज्य के उच्चा पदस्थ व्यक्ति हो सकते हैं।
 4. यदि जन्म के समय बृहस्पति और चंद्रमा केन्द्र में हों और उनको शुक्र देखते हों एवं कोई ग्रह नीच राशि में ना हो तो मनुष्य अतुल कीर्ति वाला राजा होता है।
5. शुक्र बली हों और चतुर्थ भाव से उनका किसी भी प्रकार का संबंध हो तो व्यक्ति बहुत धनी होता है।
7. यदि चतुर्थ भाव से चन्द्रमा, बुध और शुक्र का संबंध हो और इन तीनों ग्रहों का लग्न या लग्नेश से भी संबंध हो जाए तो महाराजा योग होता है और ऎसा व्यक्ति अपार सम्पत्ति का स्वामी होता है।
8. बली शुक्र लग्न से एकादश भाव या द्वादश भाव में स्थित हों तो राजयोग होता है।
शुक्र से बनने वाले अन्य योग
 1. लक्ष्मी योग : यदि भाग्य स्थान का स्वामी और शुक्र दोनों अपने ही भाव में या उच्चाराशि में स्थित होकर लग्न से केन्द्र या त्रिकोण में हों तो लक्ष्मी योग बनता है।
फल : यह एक उत्तम राजयोग है। इस योग में जन्मा व्यक्ति अच्छे स्वभाव वाली स्त्री को पाने वाला, तेजस्वी, धनी, निरोगी, दूसरों को खुश रखने वाले, दानवीर, उत्तम सवारियों से युक्त एवं दूसरे लोगों की रक्षा करने वाला व एक अच्छा शासक होता है।
2. सरस्वती योग : यदि बुध, बृहस्पति, शुक्र, लग्न से केन्द्र या त्रिकोण या द्वितीय स्थान में हों और बृहस्पति स्वराशि, मित्र राशि या उच्चा राशि में बलवान हों तो सरस्वती योग बनता है।
फल : जिस व्यक्ति की जन्मकुण्डली में सरस्वती योग हो वह बहुत बुद्धिमान, नाटक, गद्य-पद्य, अलंकार शास्त्र तथा गणितशास्त्र, रचना, लेखक, शास्त्रार्थ में भी पारंगत, पूर्ण पंडित होता है। इनकी कीर्ति चारों तरफ फैलती है। अतिधनी, स्त्री, पुत्र आदि के सुख से युक्त और राजाओं द्वारा सम्मानित किये जाते हैं और बहुत भाग्यवान होते हैं।
3. श्रीनाथ योग : यदि बुध, शुक्र और भाग्य स्थान (नवम भाव) के स्वामी, यह तीनों उच्च राशि, स्वराशि या मित्रराशि में स्थित होकर, लगA से केन्द्र या त्रिकोण में हों तो श्रीनाथ योग बनता है।
फल : इस योग में जन्मे जातक धनी, मीठा प्रिय वचन बोलने वाले होते हैं। अच्छे लेखक, अपनी वाणी से दूसरों को प्रभावित करते हैं। भगवान नारायण के चिह्नों से शंख, चक्र आदि से चिह्नित होते हैं। ऎसे व्यक्ति दूसरों के साथ सदैव आनन्द देने वाले, स्त्रोतों या नामावली का संकीर्तन करते रहते हैं। जो लोग विष्णु भक्त होते हैं उनका ये लोग बहुत प्रसन्न ह्वदय से आदर करते हैं। जो लोग श्रीनाथ योग में उत्पन्न होते हैं वह स्वयं ब़डे सुंदर होते हैं। ऎसे व्यक्तियों को अच्छे पुत्रों और स्त्री का पूर्ण सुख प्राप्त होता है।
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