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राहु और तकनीकी उद्योग - डी.सी. प्रजापति
विभिन्न ज्योतिष्ा शास्त्रों में राहुदेव को छाया और माया का प्रतिनिधि ग्रह माना जाता है। कहीं राहुदेव मायावी हो जाते हैं तो कहीं तंत्र विज्ञानी। कहीं पराप्राकृतिक रहस्यों में लीन रहते हैं तो कहीं उन्हीं रहस्यों का तंत्र तकनीक के माध्यम से उद्घाटन करते प्रतीत होते हैं। ज्योतिष शास्त्रों में आया है कि सूर्यदेव मानव के यथार्थ व्यक्तित्व के प्रतिनिधि हैं तो वहीं राहुदेव मानव के रहस्यमय व्यक्तित्व के कारक हैं। राहुदेव की एक ओर रहस्यमयी एंव भ्रामक चरित्रगत विशेषताएँ जगत व्यवहार में अपना वर्चस्वस्थापित किये हुए हैं तो दूसरी और उनकी इन रहस्यमयी चारित्रिक विशेषताओं का यथार्थ प्रकट होना उनके व्यावहारिक पक्ष को प्रबल करता है। ऎसे दोहरे व्यक्तित्व के धनी राहुदेव के प्रसंग में जब हम ज्योतिष्ाीय आधार पर चिंतन मनन करते हैं तो पाते हैं कि राहुदेव की वर्तमान भौतिक जगत में अहम भूमिका है। आज विश्व की अर्थव्यवस्था के मूल आधार हैं उद्योग और तकनीक। जब हम तकनीक और औधोगिक ढांचे पर दृष्टिपात करते हैं तो निश्चय ही राहुदेव के सर्वव्यापक अस्तित्व एवं व्यापकता स्वत: प्रकट होने लगती है।
इस लेख में हम राहुदेव की उद्योग और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका पर चिंतन करेंगे और इन क्षेत्रों में राहु देव की भूमिका एवं महत्ता पर प्रकाश डालने का प्रयास करेंगे।
वर्तमान में ऎसे कई उद्योग और तकनीकी क्षेत्र हैं जिनमें राहुदेव की सक्रिय संलगAता प्रकट होती है और उनके प्रधान कारक राहुदेव ही मिलते हैं। इन उद्योगों और तकनीकों में प्रमुख निमA हैं:-
1. खान एवं खनन उद्योग एवं तकनीक।
2. औषधनिर्माण, फार्मास्यूटिकल और विषविज्ञान उद्योग एवं तकनीक।
3. सुगंध एवं तामसिक भोज्य पदार्थ, प्रसंस्करण शालाएं एवं तकनीक
4. तंत्र कम्प्यूटर तकनीक, मास मीç़डया, फिल्म उद्योग एवं तकनीक।
5. प्लास्टिक उद्योग एवं तकनीक
6. सट्टा, लॉटरी, स्टॉक एक्सचेंज आदि
7. वायुयान, पवन चक्की, पवन ऊर्जा आदि
8. अन्य उद्योग एवं तकनीक
 खान एवं खनन उद्योग एवं तकनीक भूगर्भीय गवेषण एवं विदोहन खनन आदि पर राहुदेव का प्रत्यक्ष प्रभाव माना गया है क्योंकि ये पृथ्वी के गर्भस्थ रहस्य हैं और रहस्यों को प्रकट करना राहु का कार्य हैं। वैसे भी ज्योतिष गं्रथों में राहु का पंच धातुओं से घनिष्ठ संबंध माना गया है जिनमें सीसा, लोहा और स्टील राहु के अतिप्रिय विषय हैं। जब राहु देव की इन धातुओं में भूमिका पर चर्चा करते हैं तो अवश्य ही सीसा उद्योग, लौह उद्योग, इस्पात उद्योग और उनकी तकनीकों में राहु की सक्रिय भूमिका स्वत: स्पष्ट हो जाती है।
जब हम खनन उद्योग की चर्चा करते हैं तो वर्तमान युग के काले सोने (Petroleum) से अनभिज्ञ नहीं रह सकते क्योंकि काला सोना(पैट्रोलियम पदार्थ) आज के औद्योगिक जगत में एक क्रांति हैं जो सम्पूर्ण विश्व को प्रत्यक्ष एंव गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं। वैसे भी देखें तो यवन देशों (अरब देश) पर राहु का आधिपत्य माना जाता है और वहां निवास कर रही मलेच्छ जातियाँ भी राहुदेव के ही परिधि क्षेत्र में आती है। अत: सभी पैट्रोलियम उत्पादक देश, उनकी अर्थव्यवस्था और तकनीक सभी राहु के प्रत्यक्ष विषय है जो पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था पर वर्चस्व स्थापित किए हुए हैं। इस प्रकार यह स्पष्ट हो जाता है कि खान एवं खनन उद्योग एवं पैट्रोलियम उद्योगों पर अपनी छाप छो़डने वाले राहु इस क्षेत्र में अहम् महत्ता रखते हैं।
औषण निर्माण, विष्ा विज्ञान और फार्मास्युटिकल उद्योग
 सर्वत्र व्याप्त है कि राहुदेव का विष, विषैले पदार्थ, विषाक्त रसायन, विषाक्त औषधियाँ, विषैले कीटनाशक पदार्थ आदि से गहन संबंध हैं क्योंकि राहुदेव को सर्प (विषधर) का प्रतीक माना जाता है। चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में आज औषध निर्माण विश्व का दूसरा सबसे ब़डा उद्योग माना जाता है। आज की मानवता औषधियों के अधीन जीवित है। चारों ओर रोगों का बोलबाला है यदि काव्यात्मक रूप में कहें तो चारों तरफ लगे हैं बर्बादियों के मेले अर्थात नये-नये रोगों का जन्म हो रहा है और नई-नई औषधियों का निर्माण । निश्चय ही ऎसी परिस्थिति में औषधनिर्माण उद्योग जो विषौषधियों पर अवलंबित हैं, में राहुदेव की केन्द्रीय भूमिका स्वत: सिद्ध हो जाती है।
 फसलों के कीटनाशक उर्वरकों का निर्माण भी विषैले पदार्थो से ही होता है, इसलिए सभी प्रकार के फार्मास्यूटिकल उद्योग और उनकी तकनीक में राहुदेव शीर्षस्थ रहते हैं।
सुंगध एवं तामसिक भोज्य पदार्थ, प्रसंस्करण उद्योग एवं तकनीक सर्पो का सुगंधित पदार्थो से विशेष आकर्षण आदिकाल से देखा गया है। कहा भी जाता है कि चंदन विष व्यापे नहीं लिपटे रहत भुजंग अर्थात चंदन की सुगंध के कारण सर्प उससे सदैव लिपटे रहते हैं और सर्पो के प्रतिनिधि हैं राहुदेव। इस प्रकार हम देखते हैं कि समस्त कॉस्मेटिक उद्योग, सुगंधित इत्रादि उद्योग सभी राहुदेव के ही अधिकार क्षेत्र में आते हैं। इसके साथ ही राहुदेव को तामसिक प्रकृति का माना गया है, इसलिए तामसिक व्यंजनों, भोज्य पदार्थो से संबंधित सभी उद्योग एवं चटनी, अचार, सॉस, सूप आदि बनाने वाली प्रसंस्करण शालाएँ सभी राहुदेव की ही थाती हैं क्योंकि प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूपसे ये सभी पदार्थ रसायनों से गहन संबंध रखते हैं। इन उद्योगों में प्रयुक्त होने वाली तकनीकों और मशीनी तंत्र पर भी राहुदेव का ही आधिपत्य स्वीकार करना होगा।
टेलीविजन, कम्प्यूटर तकनीक, मॉसमीडिया फिल्म उद्योग टी.वी., कम्प्यूटर, मोबाइल, मॉस मीडिया और फिल्म उद्योग आदि में राहु के प्रत्यक्ष प्रभाव देखे गए हैं। यह बात अलग हैं कि इनमें अन्य ग्रह जैसे मंगल, शनि शुक्र आदि भी अपना महत्वपूर्ण योगदान देते हैं परंतु राहु की भूमिका को कतई नकारा नहीं जा सकता। जब हम मॉस मीडिया की बात करते हैं जो आज के युग की सर्वोत्तम सूचना तंत्र की इकाई है तो पता चलता है कि समाज में व्याप्त गुप्त रहस्यों, ष़डयंत्रों आदि को मीç़डया कर्मी ही प्रकट करने में समर्थ रहते हैं, यहीं कारण हैं कि उन पर राहु का प्रभाव होता है।
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