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राहु के नक्षत्र - सुमन सचदेवा
राहु को तीन नक्षत्रों का स्वामित्व है- आद्राü, स्वाति और शतभिषा। आद्राü का शाब्दिक अर्थ है नमी अर्थात उषाकाल के ओसबिन्दु अथवा वर्षा या रत्न समान चमकते अश्रु बिंदु। इस नक्षत्र का प्रतीक चिन्ह है अश्रु बंूद। इस नक्षत्र के व्यक्ति गहन भावनाशील होते हैं और दूसरों की भावनाओं को भी आसानी से समझ लेते हैं। ये व्यवहारिक होते हैं तथा विषम परिस्थितियों एवं दुखों को बांटने में विश्वास करते हैं। इनकी भावनाएं अप्रत्याशित होती हैं, लोग इनको कभी खुशी कभी गम की मुद्रा में पाते हैं। आंसू और वर्षा दोनों घुटन को कम करते हैं और मानसिक प्रसन्नता एवं ताजगी प्रदान करते हैं। घोर विषम परिस्थितियों का ये डटकर मुकाबला करते हुये पुन: नवीन जोश एवं उत्साह के साथ जीवन की नई शुरूआत करने लगते हैं। इस नक्षत्र के स्वामी रूद्र हैं जो भगवान शिव के रौद्र रूप का प्रतीक हैं। रूद्र का आशय भी है- विनाश के बाद परिवर्तन। ये अपने आस-पास घटने वाले मृत्यु, दुख, शोक, कष्ट आदि से जुडे़ रहते हैं तथा इनमें आशा की किरण ढूंढते हैं। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इस नक्षत्र का संबंध राक्षसी त़ाडका से जो़डा जाता है। त़ाडका ने ब्रrाा जी से शक्ति प्राप्त करने के लिये ब्रrाा जी की घोर एवं अथक तपस्या की थी। इसलिए ये भी निरंतर प्रयास करते हैं और दृढ़ निश्चयी होते हैं।
इनकी विचारधारा में कुछ भी असंभाव नहीं है सब कुछ संभव है। इस नक्षत्र में राहु और बुध का संयुक्त प्रभाव है। इसलिए बुध इनके मन मस्तिष्क में उर्वराशक्ति भरते हैं तथा राहु इनमें ऊर्जा जगाते हैं। इनमें अद्वितीय विश्लेषण बुद्घि होती है। ये अथक परिश्रमी होते हैं तथा प्रत्येक बात पर गहनता से चिंतन करते हैं। ये विलक्षण स्मरण शक्ति के धनी होते हैं और तात्कालिक प्रतिक्रिया अभिव्यक्त करते हैं।
यह शाश्वत सत्य है कि अतिसर्वत्र वर्जयेत। यदि शक्ति सीमाओं का उल्लघंन करने लगे तो वह उद्देश्यहीन हो जाएगी। इनको दूसरों की मुक्तकंठ से प्रशंसा करनी चाहिए, अहंकार से बचना चाहिए, क्योंकि इनके स्वभाव में अहंकार परिव्याप्त रहता है।
महामहिम राष्ट्रपति एफ. डी. रूजवेल्ट और अकबर बादशाह आद्राü नक्षत्र के थे।
स्वाति: "स्वाति" का षाब्दिक अर्थ है "तलवार" जो आप में व्याप्त स्वतंत्र रहने की तीव्र इच्छा को व्यक्त करता है। इस नक्षत्र में षुR एवं राहु के संयुक्त प्रभाव हैं। इस नक्षत्र में जन्मे व्यक्ति मधुर भााी एवं स±दय होते हैं। ये भावना प्रधान और कूटनीतिज्ञ होते हैं और उचित समय पर ही अपनी çRया-प्रतिçRया व्यक्त करते हैं। इस नक्षत्र का प्रतीक चिह्न है- हवा में तेजगति से उ़डता हुआ एक पौधा। इनमें हवा के तेज झोंकों में भी जीने की षक्ति है। इससे इनकी जीने की अभिलाशा प्रकट होती है। धैयपूर्वक प्रतीक्षा करने की योग्यता इनके गुणों में निखार लाती है। ये जीवन में संतुलन बनाए रखते हैं। ये जिज्ञासु होते हैं और नवीन विचारों को खुले मन से स्वीकार करते हैं। इनमें सीखने की प्रबल इच्छा प्रंषसनीय है। ये दीर्घकालीन योजनाएँ बनाते हैं। इनके आसपास के लोग इनके सामाजिक गुणों एवं साहसी व्यक्तित्व की प्रषंसा करते है। इनके चेहरे पर अनायास ही मंद मुस्कान झलकती है, विषेशत: जब ये किसी सामाजिक आयोजन में रहते हैं। इस नक्षत्र के स्वामी राहु ज्ञान की देवी सरस्वती से संबंधित है। संगीत, कला और ललित कलाओं में ये नैसर्गिक रूप से अभिरूचि रखते हैं तथा निपुणता प्राप्त करते हैं। इस नक्षत्र के देवता "वायु" है जो हवा के स्वामी हैं। इस नक्षत्र में जन्मे व्यक्ति साहसिक कायोंü में रूचि रखते हैं।
धार्मिक दçष्श्टकोण से वायु का हनुमानजी से अट्टू संबध है। ये प्राय: स्वयं को अवमूल्यांकित करते हैं और अपने भीतर छिपी गुप्त संभावनाओं के प्रकटीकरण के लिए इनको अभिप्रेरित करना पडता है। ये साधन सम्पन्न रहते हैं तथा अपने संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करना जानते हैं।
 इनके व्यक्तित्व में कुछ प्रतिकूल बातें भी होती हैं। ये कभी-कभी कूटनीति का अधिक प्रयोग करने लगते हैं। इनको अति स्वार्थपरकता पर ध्यान देना चाहिए। इनको अपने चरित्र में परिव्याप्त भोगवाद एवं वासनाओं पर नियंत्रण रखना चाहिए। यदि ये आप इन प्रयासों में सफल रहते हैं तो आध्यात्मिक उँचाइयाँ छूने लगते हैं। चार्ली चैप्लिन इसी नक्षत्र मे जन्मे थे।
षतभिशा का अर्थ है "सौ षरीर çRया विज्ञानी"। इस नक्षत्र में जन्मे व्यक्ति नैसर्गिक गुणों से युक्त होते हैं। ये केवल षारीरिक ही नहीं हार्दिक एवं आत्मिक समस्याओं का भी निदान करते हैं। किसी भी बात को गुप्त रखना इनका मुख्य गुण है। इस नक्षत्र का प्रतीक चिन्ह "स्थान घेरते वृत्त के समान" है। इस नक्षत्र को सारंग (घूंघट युक्त अथवा अवगुंठित) नक्षत्र भी कहते हैं। इनमें अपार षक्ति तरंगे और असीम कार्यक्षमताएं भरी होती हैं। यं भलीभांति जानते हैं कि विशम परिस्थितियों पर कैसे काबू पाया जावे और अपने विरोधियों पर कैसे विजय पाई जावे। इस नक्षत्र पर राहु और षनि का प्रभाव है। ये प्रत्येक चीज को षंकालु दृश्टि से देखते हैं और लोगों में समायोजित होने में इनको कुछ समय अवष्य लगता है। इसीलिए ये चौकन्ने एवं सजग रहते हैं और अनायास आने वाली समस्याओं से बच जाते हैं। ये ना तो किसी के कार्य में हस्तक्षेप पसंद करते हैं और ना ही अपनी दिनचर्या में हस्तक्षेप पसंद करते हैं अर्थात ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर। ये अपने ही मित्रों में रहना पसंद करते हैं और ये मित्र भी अंतर्मुखी प्रकृति के होते हैं । ये हरेक रहस्य से परिचित रहते हैं। इनमें एक बुराई भी है कि ये अनावष्यक एवं अनपेक्षित रूप से सत्य को बोल देते हैं जिससे ये समस्या में प़ड जाते हैं। इनके लिए सिद्वान्त भावनाओं से भी बडे़ होते हैं और ये सिद्धान्त इनकेे अपने बनाए हुए होते हैं जो इनको कभी-कभी संवेदनाहीन भी बना देते हैं। ये जन्मजात दार्षनिक हैं और इनके मस्तिश्क की बिना किसी पूर्वाग्रह के तार्किक एवं विष्लेशणात्मक सोच इनको दर्षन के क्षेत्र में अपार सफलताएं देती है। ये अपने व्यक्तित्व, वस्त्र परिधान, चुस्ती आदि की परवाह नहीं करते। इनमें उद्यमिता का गुण प्रषंसनीय है।
इस नक्षत्र के स्वामी देवता समुद्र के स्वामी वरूण है। इनमें समुद्र जितना धैर्य है एवं ये समुद्र की भांति गहन गंभीर हैं। यदि ये गहराई से प्रयास करें तो मानव षरीर में छिपी कुंडलिनी षक्ति को भी जाग्रत कर सकते हैं। ये बहुत महत्वाकांक्षी एवं परिश्रमी होते हैं।
इनका एकाकीपन इनके जीवन में निराषाभाव पैदा करता हैै। इनका अन्तर्मुखी स्वभाव इनको सदैव कर्तव्यों में लगाए रखता है और इसी कारण ये जीवन के वास्तविक आनंद से वंचित रह जाते हैं। इनके स्वभाव का रूखापन एवं स्पश्टवादिता इनको कई बार धर्म संकट में डाल देता है। कभी-कभी ये अतिRोधित अवस्था में विध्वंस भी करने लगते हैं। इनको दिन प्रतिदिन की छोटी-छोटी बातों को छो़डकर अपने भीतर छिपी गुप्त एवं असीमित ऊर्जा का भरपूर उपयोग करना चाहिए।
गुरूदत्त, इमरान खान और जे.आ.डी.टाटा इसी नक्षत्र में जन्मे थे।
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