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मंगल और शुक्र का मुंबई में प्राकट्य

मंगल और शुक्र का मुंबई में प्राकट्य जब हम फिल्मी सितारों की कुंडलियों का विश्लेषण, निरूपण करते हैं तो ऎसा प्रतीत होता है कि मंगल और शुक्र देव मुंबई में प्रकट हुए हैं। कई महासितारों, सुपरस्टारों की जन्म पत्रिकाओं में मंगल पर शुक्र का प्रभाव अवश्य मिलता है, चाहे यह प्रभाव राशिगत हो अथवा नक्षत्रगत। ये महासितारे किसी वृक्ष या लताकुंज के आस-पास मधुर गीत ही नहीं गुनगुनाते अपितु ये स्कूल से, पढ़ाई से जी चुराकर आने वाले बच्चों को भी अपने थियेटर में आने को अभिप्रेरित करते हैं। हेलन और बिन्दु की अपेक्षा कोयल स्कूली बच्चाों को अधिक प्रेरित और आह्लादित करती है।

केवल स्त्री सितारों ने ही नहीं, पुरूष सितारों ने भी थियेटरों के विकास में स्वर्णिम इतिहास रचा है। लोग ऎसे महान सितारों की झलक पाने और उनके स्पर्श को आतुर रहते थे। कई महान सितारों की तस्वीरें तो शयन कक्षों से हटकर पूजाकक्षों, निज मंदिरों में चली गई। स्त्री सितारों का एक समूह जैसे साधना, नूतन, नरगिस, मुमताज, हेमा मालिनी, वहीदा रहमान, मधुबाला, शर्मिला आदि नये जमाने की दुनिया की मल्लिकाएँ थीं और उनके जमाने में उनका कोई सानी (समकक्ष)नहीं था। एक ओर साधना ने बालों की विशिष्ट शैली में कटिंग कराकर नये फैशन को जन्म दिया तो वहीं दूसरी ओर देव आनंद का गले का लाल रूमाल एक सदाबहार पसंद थी। स्त्री और पुरूष सितारों में लेशमात्र भेद नहीं था।

ज्योतिषीय दृष्टिकोण से विश्लेषण करने पर हम पाते हैं कि इन सितारों की जन्मपत्रिकाओं में मंगल और शुक्र की, उन पर असीम कृपा बनी हुई है और इनमें कुछ समानताएँ दृष्टिगोचर होती हैं। जैसे कि मंगल ने शुक्र की राशि अथवा शुक्र के नक्षत्र में स्थित होकर ऎसी प्रतिभाओं को जन्म दिया कि उन्होंने आ$जादी के बाद इस देश के युवावर्ग के सपनों की हसीन दुनिया को उनके यथार्थ जीवन में उतारने का करिश्मा कर दिखाया। सितारों के इन नये कारनामों से पीढ़ी-दर-पीढ़ी विचारों में अन्तर बढ़ता गया क्योंकि संगीत साम्राज्ञी लता, आशा, सुरैया, बेगम अख्तर, गीता दत्त और पुरूष फनकारों में रफी, महेन्द्र कपूर, मन्ना डे, मुकेश, हेमंत कुमार और किशोर कुमार आदि ने अपने संगीत का जादुई असर युवावर्ग की रग-रग में उतार दिया और उस जमाने में सभी पिता और उनके नवोदित युवा बच्चों में प्रतिदिन यही विवाद का कारण बन जाता था कि माता-पिता भजन पसंद करते थे, वहीं बच्चो नये संगीत के दीवाने बन गये थे।

यही कारण रहा कि मुंबई में युवा वर्ग की रोमांटिक हीरो बनने की उत्कृष्ट इच्छा और जमीन पर रहकर कुछ कर गुजरने के जोश ने मुंबई को रातोंरात हॉलीवुड के समान फिल्म उद्योग की नगरी बना दिया। पर आज आप उसी मुंबई में रोमांस, स्वप्निल संसार, पाखंड, धोखाध़डी, लूट खसोट, अपराध और अन्य सभी प्रकार की बुराइयों का पिटारा देख सकते हैं। हम वास्तव में यह समझ नहीं पा रहे हैं कि हमारी पुरानी संगीत मल्लिकाओं ने नई पीढ़ी के सितारों के लिए सोचा होगा, गीत रचे-गाये होंगे पर वे आज क्रू र, पाशविक और गैर-हीरो होने की भूमिका निभाने लगे हैं परन्तु एक बात निश्चित रूप से हमने इन सितारों में समान रूप से पाई है- मुंबई में मंगल और शुक्र का प्राकट्य (उदय होना)। इन प्रसिद्ध सितारों की जन्म कुण्डलियोे का निरूपण करने पर एक बात सामने आती है कि इन सबकी जन्म पत्रिकाओं में मंगल शक्तिशाली होकर शुक्र के नक्षत्र में स्थित हैं अथवा शुक्र की राशि पर दृष्टि डाल रहे हैं। मंगल और शुक्र को अलग रखकर अध्ययन करते हैं तो हम पाएंगे कि जिस ऊँचे मुकाम पर ये सितारे पहुँचे, उस मुकाम पर बहुत से अन्य सितारे नहीं पहुँच पाए। ज्योतिष विज्ञान में

शुक्र-मंगल की युति को हेय माना जाता है परंतु अभी कुछ वर्षो में हुए सांख्यिकीय अध्ययनों के आधार पर यह पता चला है कि मंगल-शुक्र का संयोजन गंधर्व विद्या सीखने में जातक की सहायता करता है। प्राचीन काल में गंधर्व विद्या नृत्य, संगीत, कला और ऎसी ही अन्य विद्याओं के समान थी। अपने अज्ञातवास के दौरान पाण्डवों ने विराट नगर के राजा की पुत्री को गंधर्व विद्या की शिक्षा दी थी और बाद में यही कन्या अर्जुन के पुत्र, अभिमन्यु की पत्नी बनी थी। प्राचीन भारत में यह एक दुर्लभ दृष्टांत है कि किसी ऎसी गंधर्व विद्या प्रवीण कन्या को पुत्र वधू के रूप में स्वीकार किया गया हो। इस ज्योतिष्ाीय योग के कुछ दुष्परिणाम भी सामने आने लगे हैं क्योंकि बहुत से माता-पिता अपनी पुत्रियों को येन-केन प्रकारेण सितारा बनाने की हो़ड में लगे हुए हैं।

छल-कपट और धूर्तता से ऊपर उठे लोग जल्दी ही हाशिये पर चले जाते हैं। इन सब बातों की पुष्टि ऎसे व्यक्तियों की कुण्डलियों में हो रहे मंगल-शुक्र के सुखद संयोग से की जा सकती है, जो असंख्य लोगों को अपना दीवाना (प्रेमी) बना लेते हैं। चन्द्र-मंगल संबंध भी इसी संदर्भ में प्रशंसनीय माने गये हैं और विशद् विश्लेषण के लिए प्राचीन ज्योतिषीय ग्रंथों में यत्र-तत्र बिखरे अन्य ऎसे ही योगों पर ध्यान देना होगा। शीर्ष स्तर के संगीतकार, सितारे, नेता, प्राकृतिक उपचारक, रोमांटिक कथाकार और शास्त्रीय संगीतकार आदि या तो मंगल-शुक्र अथवा चन्द्र-मंगल के परस्पर संबंधों की देन होते हैं। आज हम देख रहे हैं कि शुक्र की युति वाले लोग या तो हॉलीवुड या बॉलीवुड में व्यवसाय करते हैं। सॉफ्टवेयर और ऎसे ही ललित कार्य जिनमें अधिक यथार्थ की आवश्यकता प़डती हो, वे करते हैं।

भारतीय पौराणिक ग्रन्थों में शुक्रदेव की धन संपदा देने संबंधी समस्त अधिकारों से सम्पन्न रूप में प्रशंसा या स्तुति की गई है। यही कारण है कि लोग कला और धन-संपदा के लिए शुक्र की पूजा करते हैं। ज्योतिषी भी शुक्र की स्थिति के अनुसार धन संपदा बताते हैं। निश्चित ही, यदि किसी बच्चो की जन्मपत्रिका का परीक्षण किया जावे तो मंगल और शुक्र ही उसके बॉलीवुड में व्यवसाय का निर्धारण करेंगे।

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