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बर्निंग मुम्बई

मराठा गढ़ मुम्बई एक बार फिर चर्चा में है। शिवाजी के समय जो हुआ था उसमें भारत राष्ट्र को बचाने की मुहिम थी परन्तु इस बार जो हो रहा है उसमें पूरा खतरा क्षेत्रवाद के उभरने का है। मराठा मानस का नारा मराठी नेताओं द्वारा अपनी व्यक्तिगत व दलीय सत्ता को बचाने का नारा है। उसमें छिपे खतरों से वे आगाह हैं परन्तु उनको परवाह नहीं है। कल को बिहार या उत्तर प्रदेश ने नारा दे दिया कि मराठी लोगों को बाहर निकालो तो ब़डी मुश्किल हो जाएगी। 50 वर्षो की सम्पन्नता का इतिहास कोई बहुत ब़डा नहीं है और मुम्बई के अतिरिक्त अन्य शहर भी धनी या व्यावसायिक गतिविधियों के केन्द्र हो सकते हैं। हमने इन्हीं वर्षो में बंगलौर, सूरत, अहमदाबाद, जयपुर, गु़डगाँव, नोएडा, लुधियाना, जालंधर इत्यादि शहरों को पनपते देखा है। इनमें से कई शहरों में अत्यधिक विकसित हो जाने की क्षमता है। अब धन समुद्र से नहीं आ रहा है, अब धन सूचना प्रौद्योगिकी से आ रहा है। ब़डे घराने अपने फैक्ट्रियों से इतना नहीं कमा रहे जितना सूचना प्रौद्योगिकी से कमा रहे हैं। टेलीकम्युनिकेशन के माध्यम से धनी होने वालों का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। इसके लिए किसी समुद्र के किनारे बसे शहर का होना आवश्यक नहीं है। किसी अत्यधिक धनी व्यक्ति के लिए मुम्बई में जन्म लेना भी आवश्यक नहीं है। इन भौगोलिक तथ्यों को जानते हुए भी कुछ लोगो को बिल्कुल भी परवाह नहीं है और वे सहअस्तित्व का सिद्धांत भूल गए हैं। मुम्बई जल रही है और पी़डा झेल रही है परन्तु इस क्रम में राष्ट्रवाद और सहअस्तित्व का सिद्धांत दफन हो रहा है।

ज्योतिष के पैमाने से

मेदिनी ज्योतिष में मुम्बई की राशि को लेकर बहुत विवाद रहा है। टॉलेमी और वराहमिहिर ने अलग-अलग राशियां दी हैं। मुम्बई की राशि सिंह होने को लेकर बहुत वर्षो तक चर्चा चली है। तुला राशि पर भी बहुत अभ्यास किया गया है परन्तु ज्यादातर विद्वान वृश्चिक राशि मानते हैं। वर्तमान घटनाक्रम भी इस बात की पुष्टि करता है।

जब से कन्या राशि पर शनि आए हैं उसके काफी पहले से वृश्चिक राशि पीç़डत होना शुरू हो गई थी। सिंह राशि से 13 सितम्बर 2009 को शनिदेव ने कन्या राशि में प्रवेश किया है। ऎसा माना जाता है कि राशि प्रवेश से करीब छह महीने पहले शनिदेव अगली राशि का परिणाम देना शुरू कर देते हैं। इस गणित से शनिदेव मार्च 2009 के बाद अगली राशि का आंशिक परिणाम देना शुरू कर चुके हैं अत: शनिदेव के वृश्चिक राशि को दृष्टि प्रभाव 2009 के मार्च के बाद से कभी मिलने शुरू हो गए हैं।

मेदिनी ज्योतिष में स्वाति नक्षत्र को कच्छ प्रदेश का, ज्येष्ठा को मालवा का और उत्तराषाढ़ा को सम्पूर्ण गुजराज का प्रतिनिधि माना है। उधर विशाखा को नासिक और अनुराधा को कोंकण का प्रतिनिधि माना जाता है। विशाखा नक्षत्र वृश्चिक राशि के 3020" तक तथा अनुराधा को 3020" से 16040" तक माना गया है। अब जबकि शनिदेव कन्या रहते हुए वक्री हैं और 16040" से नीचे के अंशों पर दृष्टिपात किए हुए हैं इसलिए महाराष्ट्र में, विशेषतौर से मुम्बई में असंतोष उत्पन्न किए हुए हैं। मंगल ने आग में घी डालने का काम किया हुआ है। वृश्चिक राशि के स्वामी मंगल न केवल नीच राशि में हैं बल्कि वक्री भी हैं। इस कारण से वृश्चिक राशि बुरी तरह पीç़डत है और वृश्चिक राशि के क्षेत्राधिकार में रहने वाले लोगों को यह समझ मे नहीं आ रहा है कि क्या करेंक् न केवल मुम्बई जल रहा है बल्कि राष्ट्रीयता की भावना, सहअस्तित्व का सिद्धांत और सुरक्षा की भावना को भी आग लगी हुई है। शाहरूख खान तो प्रतीक मात्र हैं, जो शिवसेना कर रही है लगभग उसी तर्ज पर वहां की कांग्रेस सरकार ने भी मराठा होने की शर्त पर ही नए लोगों को ड्राइविंग लाइसेंस देने की बात की है। आज जितनी भी राजनैतिक पार्टियां हैं उन्होंने भी तो कुछ न कुछ ऎसा पहले किया हुआ है जिसकी प्रशंसा नहीं की जा सकती। अगर मुस्लिम बहुल क्षेत्र है तो मुस्लिम को टिकट दी गई है, अगर ब्राrाण बहुल क्षेत्र है तो ब्राrाण को टिकट दी गई है और अगर वैश्य बहुल क्षेत्र है तो वैश्य को टिकट दी गई है। क्या यह बात राष्ट्रवाद विरोधी नहीं हैक् केवल शिवसेना की आलोचना करने से काम नहीं चलेगा। शिवसेना तो अतिवाद की शिकार हो गई है। वे अपने राजनैतिक लक्ष्यों की पूर्ति के लिए ऎसा कर रहे हैं। कल को ऎसा ही बिहार व उत्तर प्रदेश में होगा। यह राष्ट्रीय एकता के लिए अच्छा नहीं है।

लक्ष्मी घर बदल रही है

मुझे साफ दिख रहा है कि लक्ष्मी घर बदल रही हैं। कभी पुर्तगालियो ने मुम्बई को दहेज में दिया था। लक्ष्मीजी 500 वर्षो तक पूर्व में रहीं उसके बाद अगले 500 वर्ष पश्चिम में चली गई। इसका परिणाम यह हुआ कि पूर्वी देश गरीबी और शोषण का शिकार हुए। सम्राट अकबर का दरबार विश्व के भव्यतम दरबारों में से एक था और इतिहासकारों ने उस समय के चार महान सम्राटों में से अकबर को सर्वश्रेष्ठ बताया था। अब लक्ष्मीजी पुन: 500 वर्षो के लिए पूर्व में आ रही हैं। वे दस्तक दे चुकी हैं और इसीलिए चीन, भारत और जापान का अभ्युदय साफ-साफ दिख रहा है। आगामी बिल गेट्स इन्हीं देशों में से होगा। भारत के कुछ घराने विश्व धरातल पर तेजी से उभर कर आ रहे हैं।

परन्तु मुम्बई का भविष्य मुझे अच्छा नजर नहीं आता। अब कोई भी नया उपक्रमी मुम्बई से शुरूआत नहीं करना चाहता। सभी ब़डे घरानों ने अपने मुख्यालय बदलने की चेष्टाएं शुरू कर दी हैं। ममता बनर्जी ने टाटा की नैनो को पश्चिम बंगाल से हटाने की चेष्टा की, उस गलती को उन्होंने सुधारने की चेष्टा भी की परन्तु बात हाथ से निकल चुकी है। मुम्बई में तो ऎसी कोई कोशिश भी नजर में नहीं आ रही।

मेदिनी ज्योतिष के कूर्मचक्र में वर्णित मुम्बई के शासन वाली वृश्चिक राशि और विशाखा और अनुराधा नक्षत्र इस समय पीç़डत हैं। वृश्चिक राशि के स्वामी मंगल नीच और वक्री होने के कारण तथा कन्या मे रहते हुए वक्री शनि की दृष्टि जो कि 30 मई तक है, स्थिति को नियंत्रण में नहीं आने देंगे। यह नक्षत्र पुन: पीç़डत होंगे जब शनि 2011 की जनवरी में फिर वक्री होंगे और 25 जनवरी 2011 से 13 जून 2011 तक वक्री रहेंगे। इस अवधि में बहुत ब़डी घटनाएं आना संभावित हैं। क्षेत्रवाद पर आधारित यह युद्ध और तीव्र होगा, देश की जनता का धु्रवीकरण तेजी से होगा और इस दूषित विचार के कमजोर होते रहने के बाद भी विवाद कम नहीं होंगे। इसकी पराकाष्ठा हम तब देखेंगे जब शनिदेव वृश्चिक राशि में आने की तैयारी कर रहे होंगे। 2014 के जुलाई के बाद जबकि शनिदेव लम्बे समय तक वक्री रहने के बाद मार्गी होंगे और वृश्चिक राशि पर अपना प्रभाव छो़डने की स्थिति में आएंगे, मुम्बई का घटनाक्रम अत्यन्त संवेदनशील हो जाएगा। शनिदेव नवम्बर 2014 में वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे।

मुंबई आर्थिक राजधानी नहीं रहेगा

मार्च 2015 में जब वे वक्री होेगे और कुछ महीने तक यानि जुलाई मास तक वक्री रहेंगे, अत्यन्त तेज गति का घटनाक्रम देंगे और उस घटनाक्रम के कारण मुम्बई को बहुत भारी नुकसान होगा। इस समय तक कोई न कोई मराठा क्षत्रप विवाद में बना रहेगा और सारे देश में प्रतिक्रिया के बाद भी इस तरह के विवाद चलते ही रहेंगे। इस सम्पूर्ण प्रक्रिया में अर्थात् 2010 से 2015 के बीच में देश की व्यावसायिक राजधानी मुम्बई का स्टेटस गिर चुका होगा और कोई अन्य शहर व्यावसायिक राजधानी बनने की दौ़ड में आगे आ चुका होगा। बाद में 2018 के बाद मुम्बई का पुन: उत्थान होगा।

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