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चंद्रमा और व्यक्तित्व

कवि, शायर, प्रेमी, मां, हर किसी ने चन्द्रमा को माध्यम बनाया। मन का कारक ही मन की बात को गहराई से समझ सकता है और उसकी अभिव्यक्ति कर सकता है। किसी विद्वान ने कहा है कि मन के हारे हार है और मन के जीते जीत। यदि इन पंक्तियों को ज्योतिष के परिप्रेक्ष्य में देखें तो यहां मन चन्द्रमा है अर्थात जन्म कुंडली में चन्द्रमा की स्थिति ही विचारों, दृष्टिकोण और सोच का निर्धारण करती है। यदि कुंडली में चन्द्रमा बली है तो मन को बल प्राप्त है। इसका तात्पर्य है कि व्यक्ति का मनोबल ऊंचा और दृढ़ है। मनोबल ही व्यक्ति को विपरीत परिस्थितियों से ल़डने की क्षमता देता है। अत: बली चन्द्रमा व्यक्ति को जुझारू बनाता है। उसे दृढ़ विश्वास होता है कि मेहनत करने वालों की कभी हार नहीं होती। इसके विपरीत यदि कुंडली में चन्द्रमा क्षीण या कमजोर हो तो यह कमजोर मनोबल का संकेत है। ऎसा व्यक्ति परिस्थितियों के अधीन होता है। मुश्किल समय में ये मैदान-ए-जंग में डटे रहने के बजाय हथियार डाल देते हैं। कुंडली के कमजोर चन्द्रमा वह मनोवृत्ति देते हैं। जब व्यक्ति अपनी परेशानियों को कई गुना बढ़ाकर देखता है। जीवन में घटी कोई भी दुर्घटना बली चन्द्रमा वाला व्यक्ति खुद को दु:ख के सागर में जल्दी उबार लेता है परन्तु बादलों को जल्दी नहीं छंटने देता। यही अन्तर व्यक्तित्व निर्माण और सफलता का मापदण्ड तय करता है। इसे एक छोटे से उदाहरण से समझा जा सकता है। अ और ब नाम के दो व्यक्तियों के जीवन में कोई कष्ट आया जिसकी तीव्रता एक समान है। अ इस सदमे से पांच दिन में उबर गया परन्तु ब उसी सदमे से दस दिन में उबर पाया। इन दोनों व्यक्तियों की सफलता के बीच में इन पांच दिनों का फांसला हमेशा रहेगा। कवि हरिवंशराय बच्चान की पंक्तियां यहां युक्तिसंगत हैं-

नी़ड का निर्माण फिर-फिर।

                     नेह का आह्वान फिर-फिर। 

यह पूर्णत: सत्य है कि सुख-दु:ख, आशा-निराशा बहुत हद तक हमारे नजरिए पर ही निर्भर करती है। अंग्रेजी में दृष्टिकोण को Aह्लह्लiह्लह्वस्त्रe कहते हैं। अंग्रेजी के 26 वर्णमाला को यदि 1 से 26 की संख्या दी जाए तो Attitude  का जो़ड सौ आएगा (1+20+20+9+20+21+4+5 = 100)। इससे यह सिद्ध होता है कि स्वस्थ नजरिया अपने आप में पूर्ण है और सफलता की ओर ले जाता है। नजरिया या दृष्टिकोण चन्द्रमा का ही कारक है। इसे चन्द्रमा के पक्ष बल से समझने का प्रयास करते हैं। पक्ष बली चन्द्रमा उ”ावल होते हैं। अत: जन्मकुंडली के पक्ष बली चन्द्रमा सिक्के के उ”ावल पक्ष को देखने की प्रेरणा देते हैं। वही पक्ष बलहीन चन्द्रमा ऋणात्मक सोच देते हैं। इसी दृष्टिकोण से दो वर्गो का निर्माण होता है एक आशावादी सोच वाले और दूसरे निराशावादी सोच वाले व्यक्ति। आशावादी सोच ऊर्जा और जोश देती है क्योंकि ऎसा व्यक्ति संभावनाओं को खोजता है और निर्माण को सोचता है। हरिवंश राय बच्चान ने लिखा था-

है अंधेरी रात तो दीवा जलाना कब मना है

 निराशावादी दृष्टिकोण से किस भी चीज का विकृत रूप ही दिखाई देता है। अवसर को खोजना तो दूर की बात है। यदि अवसर खुद उनका दरवाजा खटखटाए तो भी वह उसे शोर बता देते हैं। यदि क्षीण चन्द्रमा को कहीं राहु प्रभावित कर देे तो हर बात को संदेह की दृष्टि से देखने लग जाता है। जीवन में कोई अच्छा अवसर प्राप्त हुआ तो उसे किन्तु-परन्तु में उलझा दिया। सोचने में इतना अधिक समय ले लिया कि अवसर हाथ से चला गया। इसे अंग्रेजी में Paralysis of the Analysis कहते हैं। उत्तर कालामृत में कालीदास ने चन्द्रमा को हंसी-मजाक का कारक बताया है। यद्यपि हास्य-विनोद बुध के विषय माने जाते हैं तथापि चन्द्रमा का इससे सम्बन्ध है। पक्ष और अन्य बलों से युक्त चन्द्रमा एक स्वस्थ मन और जिन्दादिल प्रकृति देते हैं। ऎसे व्यक्ति की सोच का दायरा संकुचित नहीं होता। वह हास्य के मर्म को समझता है। फिर भले ही हास्य के तीर का निशाना वह खुद ही क्यों न हों! चन्द्रमा एकमात्र ऎसे ग्रह हैं जिनकी किसी से दुश्मनी नहीं है। शुभ बली चन्द्रमा जब अपना यह गुण व्यक्ति को देेते हैं तो ऎसा व्यक्तित्व तैयार होता है जो खुले दिल से, बिना किसी ईष्र्या के गुण, प्रतिभा की प्रशंसा करता है। मल्टीनेशनल कंपनियों में जिस Team Spirit की आवश्यकता होती है, वह चंद्रमा ही दे सकते हैं। पूर्वाग्रहों से मुक्त स्वस्थ सोच का व्यक्ति ही टीम भावना के साथ काम कर सकता है। चंद्रमा का आधिपत्य रोहिणी, हस्त और श्रवण नक्षत्र पर है। इन नक्षत्रों में जन्मे व्यक्ति दूसरों की मदद के लिए सदा तत्पर रहते हैं, जो टीम भावना के लिए अति आवश्यक है। मन के कारक चंद्रमा ही दूसरे का मन पढ़ने की शक्ति देते हैं। दूसरे का दर्द समझने के लिए उसे सहने की आवश्यकता नहीं होती, सिर्फ महसूस करने की होती है। महसूस करने के लिए कल्पना शक्ति की आवश्यकता होती है, यह कल्पना शक्ति चंद्रमा देते हैं। जन्मकुण्डली में चंद्रमा जितने शुभ और बली होंगे दूसरों के दर्द को समझने और महसूस करने की क्षमता उतनी ही अधिक होगी। जिनकी कुण्डली में शुभ चंद्रमा होते हैं, वे कोई भी निर्णय लेने से पहले खुद को दूसरों की स्थिति में रखकर देखते हैं। शुभ और बली चंद्रमा एक और अद्भुत गुण प्रदान करते हैं और वह है क्षमाशीलता। किसी को माफ वही व्यक्ति कर सकता है जो समझता है कि गलतियां परिस्थितिवश होती हैं और दूसरे अवसर की गुंजाइश हमेशा होनी चाहिए। इसलिए चंद्रमा व्यक्ति को Understanding  बनाते हैं। कालपुरूष की जन्मपत्रिका में चंद्रमा चौथे भाव के कारक हैं जो जनसंपर्क और लोकप्रियता का भी भाव है। व्यक्ति लोकप्रिय अपने गुणों और स्वभाव से ही होता है। चंद्रमा प्रदत्त जिन गुणों का उल्लेख हमने ऊपर किया, वे व्यक्ति को जन-जन का प्रिय बना देते हैं। हमने ऊपर हरिवंश राय बच्चान जी की कुछ पंक्तियों के माध्यम से चंद्र प्रदत्त आशावाद और जिजीविषा का उल्लेख किया है। आशा का यह संदेश देने वाले भावुक कवि बच्चान जी की कुण्डली में चंद्रमा अत्यंत शुभ और सुदृढ़ स्थिति में हैं-

इनकी कुण्डली में चंद्रमा स्वग्रही होकर दशम भाव में उच्चा के गुरू के साथ स्थित हैं। लेखन एवं बुद्धि के कारक ग्रहों ने उन्हें एक उच्चाकोटि का लेखक बनाया परन्तु यह चंद्रमा की कल्पनाशीलता ही थी जिसने उन्हें मधुशाला में भी जीवन दर्शन खोजने की प्रेरणा दी। यही चंद्रमा यदि शुभ स्थिति में न हों तो व्यक्ति एक हताशा के बाद स्वयं को मधुशाला में ही डुबो देता है। मधुशाला का अनुभव दोनों का ही है, जिसमें एक को हम पूर्णिमा से जो़ड सकते हैं तथा दूसरे को अमावस्या से। सफल व्यक्तियों को अनुकूल परिस्थितियां नहीं मिलतीं, बल्कि वे परिस्थितियों को अपने अनुकूल कर लेते हैं। ठीक इसी तरह व्यक्ति असफल इसलिए नहीं होता कि परिस्थितियां प्रतिकूल थीं, बल्कि इसलिए कि वह लहरों की विपरीत दिशा में तैर नहीं पाता। यह चंद्रमा की स्थिति ही होती है जो व्यक्ति को एक सुदृढ़ व्यक्तित्व की ओर ले जाती है। जिसकी जन्मपत्रिका में चंद्रमा बली हैं, वही निम्न पंक्तियां गुनगुना सकता है- मैं ç$जंदगी का साथ निभाता चला गया।

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