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चक्र और हम - सुमन सचदेवा
ग्रह सिर्फ हमारी जन्म पत्रिका में ही नहीं बल्कि हमारे शरीर के अंदर भी स्थित होते हैं। हमारे शरीर के भीतर स्थित ये ग्रह ऊर्जा के स्रोत होते हैं। हम सब ने शरीर में उपस्थित चक्रों के बारे में पढ़ा है परन्तु हम में से ज्यादातर यही जानते हैं और समझते हैं कि यह चक्र साधु-सन्यासियों के लिए हैं। ये अपनी साधना से इन चक्रों को जाग्रत करते हैं और दिव्य ज्ञान प्राप्त करते हैं। संभवत: इसी कारण से आम व्यक्ति कभी ऊर्जा के इन स्रोतों का पूरा फायदा नहीं उठा पाया। कुछ समय पहले एक स”ान ने विदेश से मंगवाया हुआ कैमरा दिखाया और बताया कि यह कैमरा शरीर के ऊर्जा संतुलन की फोटो खींचता है, जिसके आधार पर व्यक्ति की Counselling की जाती है और उसे जीवन की समस्याओं से निजात दिलाने की कोशिश की जाती है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि जिन बच्चाों का पढ़ाई में मन नहीं लगता उनके लिए इस विधि से Counselling करके उन्हें लाभ पहुँचाया जाता है। जाहिर है! जब कैमरा विदेश से आया है तो तकनीक का श्रेय भी विदेश को ही गया। हम यदि थो़डा सा प्रयास करें और ऊर्जा के इन स्रोतों का 5 प्रतिशत भी इस्तेमाल करे सकें तो जीवन बदला जा सकता है। सबसे पहले तो यह समझना आवश्यक है कि यह चक्र सिर्फ साधू-सन्यासियों के लिए नहीं हंै बल्कि आज की भाग-दौ़ड भरी जिन्दगी में आम व्यक्ति के लिए इसकी सबसे ज्यादा आवश्यकता है।
चक्र परिचय
हमारे शरीर में कुल 6चक्र हैं इसलिए इन्हें षट् चक्र कहा गया है। हम निम्न सारिणी से इन चक्रों की हमारे शरीर में स्थिति, इनसे संबंधित ग्रह और इनसे संचालित मुख्य विषय की जानकारी लेते हैं।



इस सारिणी से स्पष्ट है कि हर चक्र में विशेष प्रकार की ऊर्जा छिपी हुई है और हर चक्र किसी एक ग्रह से संचालित है। जो ग्रह हमारी जन्मपत्रिका में कमजोर है, उस ग्रह से जु़डा चक्र भी कमजोर होगा और उस चक्र द्वारा संचालित विषय हमारे जीवन की कमजोरी होगी।
उदाहरण के लिए जिन लोगों में rational thinking की कमी होती है, वह प्राय: समय के ताल से ताल नहीं मिला पाते हैं। जिसकी वजह से arrogant हो जाते हैं और अच्छाई छो़डकर गलत रास्ता अपना लेते हैं। ऎसे लोगों में अनाहत चक्र और शुक्र ग्रह भी कमजोर मिलता है।
इसी तरह जो बच्चो पढ़ने में मन नहीं लगा पाते हैं या एकाग्रता की कमी होती है उनकी जन्मपत्रिका में सूर्य, चन्द्रमा ग्रह कमजोर पाये जाते हैं और स्पष्ट है कि आज्ञा चक्र की ऊर्जा का उन्हें Support नहीं है।
Subconscious mind और चक्र
वैज्ञानिकों ने यह बात स्पष्ट कर दी है कि मनुष्य के अवचेतन मस्तिष्क में अपार ऊर्जा छिपी हुई है और यदि इस ऊर्जा का कुछ प्रतिशत भी सक्रिय हो जाए तो मनुष्य के जीवन में अद्भुत परिवर्तन आ सकता है। प्रश्न उठता है कि इस ऊर्जा को कैसे सक्रिय किया जा सकता हैक् कुछ वर्ष पूर्व टेलिविजन पर एक कार्यक्रम आता था "शक्तिमान", यद्यपि वह fiction से भरा हुआ कार्यक्रम था, परन्तु एक आम व्यक्ति के शक्तिमान में बलदने की प्रक्रिया इन्हीं चक्रों के माध्यम से थी।
हमारे वैदिक ऋषि-मुनि सचमुच शक्तिमान थे। हमने कई कथाएं पढ़ी हैं, जहाँ उनका शरीर तो एक स्थान पर है, परन्तु उनकी उपस्थिति कहीं और भी है। यह कोरी कल्पनाएं नहीं हैं। उन्होंने अपने चक्रों को जाग्रत कर के अपने अवचेतन मस्तिष्क की ऊर्जा का पूरा दोहन किया। चीरहरण के समय द्रौपदी की लॉज बचाने के लिए भगवान कृष्ण इसी शक्ति से हस्तिनापुर पहुंचे थे क्योंकि सशरीर तो वे द्वारका में थे।
चलिए यह तो उस युग की बातें हैं, जहां हर घटना को हम चमत्कार के रूप में ही देखना चाहते हैं या यूँ भी कह सकते हैं कि ये घटनाएं हमें चमत्कार के रूप में नहीं दिखाई जाती हंै, चाहे वो टेलिविजन हो या नानी-दादी की कहानियां।
इस युग की बात करते हैं। एक कैंसर के मरीज के लिए डॉक्टर ने कहा कि वह चंद दिनों का ही मेहमान है और घरवालों को सलाह दी कि वे इलाज कराने की बजाए बचे हुए दिनों में उनकी सेवा करें। जिस मरीज को डॉक्टर ने सिर्फ 15 दिन की मोहलत दी थी उन्हें दो साल से सामान्य जीवन जीते हुए मैं देख रही हँू। उन्होंने क्या-क्या किया, इसकी चर्चा हम अभी करेंगे, पहले एक-दो उदाहरण और देख लें।
तिह़ाड जेल में श्रीमति किरण बेदी ने सभी कैदियों के लिए कुछ विशेष कार्यक्रम शुरू किए जिसके फलस्वरूप उनके मन में अपराध बोध ने जन्म लिया और उनमें परिवर्तन की वो लौ जगी जो सभी को आश्चर्यचकित कर देने वाली थी।
पिछले दिनों टेलिविजन पर एक कार्यक्रम आता था ‘India’s Got Talent’ । इसमें कुछ लोगों ने इतने हैरतअंगेज कारनामे किए, जिसमें आम व्यक्ति की औसत ऊर्जा से अधिक ऊर्जा की आवश्यकता थी। Physically Challenged ने भी ऎसे-ऎसे कारनामे किए हैं जो पूरी तरह से स्वस्थ व्यक्ति के लिए भी बेहद मुश्किल थे।
इन सब में समान बात यह थी कि इन सबने योग और ध्यान का सहारा लिया। हमारा शरीर पंच तत्वों का बना है। इन्हीं पंच तत्वों के संतुलन पर हमारा शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य निर्भर है और इन्हीं पंच तत्वों के असंतुलन से रोग का जन्म होता है। जिस प्रकार हमारे शरीर में पाँच तत्व हैं उसी प्रकार पाँच मुख्य वायु भी होती हैं, जिन्हें प्राण, अपान, व्यान, उदान और समान कहा जाता है। योग का अर्थ जो़डना होता है और योग इन्हीं पंच तत्वों और पंच वायु में रिद्म पैदा करता है। जब हम योग को अपनाते हैं तो प्राणिक ऊर्जा सक्रिय हो जाती है और हमारे शरीर में खान-पान और जीवन शैली के कारण जो अवरोध उत्पन्न हो गये हैं, उन्हें खोलती है। इस प्रकार ऊर्जा और ऑक्सीजन हर नस के अंतिम छोर तक पहुँचती है। इस प्रक्रिया के लिए विभिन्न आसन, प्राणायाम, मंत्र, मुद्रा और ध्यान विशेष कारगर सिद्ध होते हैं।
हम सन्यासी नहीं है परन्तु गृहस्थ होते हुए भी यदि हम अपने गृहस्थ जीवन में से अमूल्य 20 मिनट सन्यास का जीवन बिता लें और इन चक्रों में व्यापत ऊर्जा का कुछ प्रतिशत भी दैनिक काम-काज के लिए इह्यतेमाल कर सकें तो निश्चित ही एक सुखद व स्वस्थ जीवन की कल्पना कर सकते हैं।
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