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ऎसी बानी... - श्रीराम शर्मा
वाणी पर कवि कबीरदास जी का एक दोहा जग में प्रसिद्ध है -
""ऎसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय।
औरन को शीतल करे, आपहु शीतल होय।""

वाणी से ही समस्त कार्य साधे जाते हैं व वाणी से ही बिग़ड जाते हैं। मीठी वाणी जहाँ व्यक्ति को सम्मान का पात्र बनाती है वहीं अप्रिय वाणी व्यक्ति को नीचा देखने पर विवश कर देती है।
ज्योतिष शास्त्र में वाणी से संबंधित अनेक योग हैं जो संबंधित भाव, ग्रह स्वामी की दशा में अति सक्रिय होकर लाभ और हानि व्यक्ति को समय-समय पर दिलाते रहते हैं, जिसका पता व्यक्ति को तो नहीं होता, परन्तु एक अच्छा (विद्वान) ज्योतिषी भलीभांति इसे पहचानता है।
आपने अपने जीवन में कभी न कभी लोगों को यह कहते हुए तो सुना होगा कि पता नहीं मैं जब भी किसी व्यक्ति विशेष से भली बात कहता हूँ तो वह उसे गलत क्यों लगती हैक्
जन्मपत्रिका के द्वितीय भाव को वाणी का क्षेत्राधिकार प्राप्त है, अन्य कई और भी क्षेत्र हैं, जिनमें से वाणी एक है। द्वितीय भाव का कारक ग्रह, राशि स्वामी, राशि स्वामी की स्थिति, द्वितीय भाव पर ग्रहों की दृष्टि सभी महवपूर्ण भूमिका निभाते हैं। द्वितीय भाव में स्थित ग्रहों के अनुसार वाणी का प्रभाव अलग-अलग देखने को मिलता है, जिनमें से हम बुध व बृहस्पति के बारे में चर्चा करेंगे।
बुध -
बुध को ग्रहों के मंत्रिमण्डल में राजकुमार कहा गया है, व्यावसायिक क्षेत्र में इन्हें Marketing से संबंधित माना गया है, जिसके बुध जन्मपत्रिका में शुभ हों तो व्यक्ति Marketing के क्षेत्र में उन्नति करता है, यदि Marketing में न भी हो तो उसे अपना कार्य बातों से निकालना बखूबी आता है।
जन्मपत्रिका में यदि बुध द्वितीय भाव में स्थित होकर स्वक्षेत्री उच्चा मूलत्रिकोण के हों तो वाक्चातुर्य कमाल का होता है। ऎसे व्यक्ति एक बार किसी विषय पर बोलना शुरू करें तो सामने वाले पर अपनी छाप छो़डे बिना नहीं रहते हैं। ऎसे व्यक्ति जहां कहीं भी ख़डें हो इनके आस-पास भी़ड अपने-आप जुट जाती है, भले ही सभा को कोई ओर सम्बोधित कर रहा है, पर लोग इनको घेर लेते हैं। यदि इस स्थिति में (द्वितीय भाव में) शुभ ग्रहों की दृष्टि का संयोग हासिल हो जाए तो ""सोने पर सुहागा"" जैसी स्थिति होगी। कई बार हम यह देखते हैं कि कोई व्यक्ति किसी विषय का पूर्ण जानकार होते हुए भी वह उसे व्यक्त नहीं कर सकता।
उदाहरण स्वरूप -
दो व्यक्तियों को हम एक ही प्रकार की ƒ़ाडी बेचने के लिए देते हैं, दोनों को ही एक साथ Marketing की टे्रनिंग भी देते हैं, किन्तु Sale का Result एक का अच्छा और दूसरे का खराब आता है। इसका सीधा सा तात्पर्य है कि जिसका Result खराब आया उसकी कुण्डली में बुध की स्थिति कमजोर है, जन्म के वक्त ग्रहों को जो रश्मिया प्राप्त होती हैं, उसमें बुध ग्रह की राशि कम ही प्राप्त हो पाई है। एलर्जी की Problem भी कमजोर बुध की निशानी है।
रश्मियों का कम प्राप्त होना पूर्व जन्म में बुध के प्रति किए गए अपराधों का परिणाम होता है। शास्त्रों में प्रत्येक कमजोर ग्रह को शक्तिशाली बनाने से संबंधित उपाय बताए गये हैं।
बुध को बलवान बनाने के लिए व्यक्ति को हरे रंग का उपयोग अधिकाधिक करना चाहिए। हरे रंग के वस्त्र, खाने-पीने की चीजों में हरी सब्जियों का प्रयोग करना चाहिए। एक हरे रंग की बोतल में पानी भरकर दोपहर को उसे धूप में रख दें व शाम के वक्त उस पानी का सेवन करें, ऎसा करने से सूर्य की रश्मियों में से बुध की रश्मि प्राप्त होगी। रात के वक्त यही प्रक्रिया चन्द्रमा की रोशनी में रखकर करना चाहिए व सुबह उसका सेवन करना चाहिए।
चन्द्रमा को वनस्पतियों का अधिकार क्षेत्र प्राप्त है, चन्द्र किरणों के माध्यम से भी बुध ग्रह की
रश्मि प्राप्त होती है। यह उपाय व्यक्ति की एक दो-दिन, माह, वर्ष नहीं बल्कि पूरे जीवन भर करना होता है।
बृहस्पति-
बृहस्पति को मंत्रिमण्डल में मंत्री का स्थान प्राप्त है, बृहस्पति देवताओं के गुरू भी हैं, अत: बृहस्पति यदि द्वितीय भाव में स्थित होकर स्वराशि, मित्रराशि, मूलत्रिकोण, उच्चा व शुभ ग्रहों से दृष्ट हों तो व्यक्ति की वाणी गंभीर होती है। एक बात जो कह दी उसी पर अ़डे रहते हैं। बृहस्पति प्रधान व्यक्ति की वाणी आदेशात्मक होती है,
इन्हेें Banker, Teacher आदि का क्षेत्राधिकार प्राप्त है। किसी भी विषय पर ज्यादा न बोलकर केवल कुछ लाईनों में ही सम्पूर्ण निचो़ड निकालने वाले होते हैं। अपनी बातों से सामने वाले को प्रभावित करते रहते हैं,
कमजोर बृहस्पति से स्थिति बिलकुल विपरीत हो जाती है। कमजोर बृहस्पति को बलवान बनाने से संबंधित उपाय भी शास्त्र में वर्णित हैं। पीले वस्त्र पहनने चाहिएं, पीले रंग की वस्तुएं (दाल, चना आदि), पीले रंग की बोतल में पानी भरकर धूप में रखें व शाम को सेवन करें। रात को पानी भरकर चन्द्रमा की रोशनी में रखें व सुबह उपयोग में ले। ऎसा करने से बृहस्पति बलवान होते हैं।
आज यदि समाज में जगह बनानी है तो वाणी से अपनी भावनाओं को व्यक्त करना आवश्यक है। एक कहावत है कि - ""बिना रोए मां भी अपने बच्चो को दूध नहीं देती है"", तो फिर हम अपनी बात बिना अपनी वाणी की अभिव्यक्ति से कैसे किसी को समझा सकते हैंक् चाहे व्यक्तिगत क्षेत्र हो, चाहे व्यावसायिक। घर में आपका हर रिश्ता आपसे भावनाओं की अभिव्यक्ति मांगता है और बाहर समाज का हर रिश्ता चाहे वह आजीविका क्षेत्र हो या मित्रवर्ग। इसलिए वाणी का सशक्त होना आज की आवश्यकता है और इन दोनों ही ग्रहों का कुण्डली में बली होना आवश्यक है। यदि बृहस्पति ज्ञान के कारक हैं और उस ज्ञान को बुध की वाणी न मिलें तो वह ज्ञान बहुत उपयोगी नीं हो पाता।
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