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वर्ष 2011 के लिए भविष्यवाणियां
(Published in E-Jyotish Manthan in Jan 2011)
1. भारत की कुण्डली में इस समय सूर्य महादशा चल रही है। यह सितम्बर 2015 तक चलेगी। इस महादशा में भारत का प्रभुत्व बढ़ेगा, सकल राष्ट्रीय उत्पादन बढ़ेगा और रीयल एस्टेट और वाहन उद्योग फलेगा-फूलेगा।
2. इस समय भारत राहु अन्तर्दशा में चल रहा है जो कि सितम्बर 2011 तक है। राहु स्वयं भी कृत्तिका नक्षत्र मे स्थित हैं जो कि सूर्य का नक्षत्र है। इस अन्तर्दशा में शासक गणों मे भारी गतिरोध, वैमनस्य, प्रतिहिंसा और संदेह का वातावरण रहेगा। शासक वर्ग से जु़डे मंत्री और अधिकारियों की ब़डे पैमाने पर गिरफ्तारियां और कानूनी कार्यवाहियां होंगी। सूर्य स्वयं आश्लेषा नक्षत्र के हैं और वर्ष के प्रारंभ मे ही अस्तंगत मंगल मिथुन राशि में होने के कारण आर्थिक घोटालों में लिप्त शासक वर्ग के बहुत सारे लोगों के विरूद्ध कानूनी कार्यवाही संभावित है। सरकार कितना ही बचाने की कोशिश कर ले, कानून अपना काम करेगा।
3. शनि के वक्री होते ही अर्थात् 29 जनवरी के बाद प्रमुख घोटालों के आरोपी कानूनी कार्यवाहियों के शिकार होने लगेंगे, इस बारे मे रोज नया समाचार सुनने को मिलेगा। किसी ब़डे अधिकारी या नेता की आत्महत्या या कोई अन्य दुर्घटना संभावित है।
4. 4 फरवरी से 28मार्च के बीच में शासक वर्ग बहुत बदनाम हो जाएगा और सूर्य महादशा, राहु अन्तर्दशा और शनि प्रत्यन्तर्दशा में शीर्षस्थ केन्द्रीय राजनेताओं में गंभीर मतभेद देखने को मिलेंगे। इस समय श्रीमती सोनिया गांधी की बुध महादशा में शनि अन्तर्दशा चल रही होगी जो कि शुभ नहीं है। उनका काफी खराब समय अगस्त-सितम्बर मे आएगा।
5. कर्क लग्न की श्रीमती सोनिया गांधी की कुण्डली में फरवरी से जून तक का समय विशेष है, जब राहुल गांधी के द्वारा कही गई कुछ बातों की विशेष चर्चा होगी।
6. बृहस्पति प्रत्यन्तर 4 फरवरी तक है। भारत की कुण्डली में बृहस्पति सबसे कम षड्बल के हैं और अष्टमेश होकर छठे भाव में बैठे हैं। इस समय भयंकर राजनैतिक और आर्थिक गतिरोध रहेंगे और सरकार को भारी परेशानियों का सामना करना प़डेगा। केन्द्र सरकार का किया गया कोई भी उपाय जनता को विश्वास नहीं दिला पाएगा। इसी अवधि में शेयर मार्केट में भारी हलचल रहेगी, निवेशक सावधान रहें।
7. आर्थिक दृष्टि से बजट काल शानदार रहेगा और मंहगाई इत्यादि होने के बाद भी सकल राष्ट्रीय उत्पादन बढ़ने और उद्योग विकास की गति बढ़ने से प्रसन्नता का माहौल रहेगा। सरकार को काफी संसाधन उपलब्ध होंगे।
8. गर्मियों के बाद दूरसंचार के क्षेत्र मे अविस्मरणीय काम होगा। भारत की संचार क्रांति अन्य राष्ट्रों के लिए प्रेरणा का काम करेगी और भारत की कम्पनियां अंतर्राष्ट्रीय क्षितिज पर कमाल का काम करेंगी। Exhiition & Mergers की भूखी भारतीय कम्पनियां विश्व की कई कम्पनियों को निगल जाएंगी। यह वर्ष भारत के आर्थिक साम्राज्यवाद के विस्तार के लिए मील का पत्थर साबित होगा।
9. 28सितम्बर से सूर्य में गुरू अन्तर्दशा शुरू हो रही है। सितम्बर से दिसम्बर पर्यन्त फिर नए घोटाले सामने आएंगे। घोटाले में फंसे हुए लोगों के खिलाफ जन असंतोष भ़डकेगा और किसी अन्य मामले में औद्योगिक घराने पुन: बेनकाब होंगे। फिर नए सत्ता के सौदागर बेनकाब होंगे। इस समय दो राज्य सरकारों पर संकट चल रहा होगा।
10. अंतिम त्रैमास में बजट घाटा बढ़ेगा, राजस्व वसूली पर्याप्त मात्रा में नहीं हो पाएगी जिसकी जवाबदेही अगले बजट के आसपास तक देनी ही प़डेगी तथा सरकार रक्षात्मक मुद्रा मे आ जाएगी। औद्योगिक घराने लगातार विकास करेंगे।
11. अंतिम त्रैमास में ही प्रमुख तीन-चार कम्पनियों के मार्केट कैपिटलाइजेशन की प्रवृत्तियों मे घात-प्रतिघात देखने को मिलेगा और लाखों करो़ड रूपए के छलकपट और प्रपंच देखने में आएंगे। व्यावसायिक घरानों की प्रतिद्वंद्विता खुलकर सामने आएगी और ब़डे घरानों की निजी कहानियां चौराहों पर आ जाएंगी।
12. नीरा राडिया जैसे और भी किस्से सामने आएंगे।
13. दूरसंचार घोटाले के मुख्य आरोपी राजा और नीरा राडिया सहित 10-12 अन्य व्यक्ति और व्यावसायिक घरानों के विरूद्ध सी.बी.आई. अपनी पूरी कानूनी कार्यवाही करेगी। इनको बचाया जाना संभव नहीं है। कांग्रेस सरकार इनकी आसानी से बलि दे देगी।
14. 2जी स्पैक्ट्रम पर विपरीत असर आने के बाद भी 3जी स्पैक्ट्रम को लेकर कोई परेशानियां नहीं आएंगी और कम्पनियां अपना काम यथावत करती रहेंगी। जून-जुलाई में जब भारत की सूर्य की महादशा में राहु अन्तर्दशा में जब शुक्र प्रत्यन्तर चल रहा होगा तो दूरसंचार के क्षेत्र मे व्यवसाय पर कब्जा करने के लिए कम्पनियों मे गला-काट प्रतियोगिता चलेगी। उस समय सरकारी कम्पनी बीएसएनएल को नुकसान इस रूप में उठाना प़डेगा कि उसके बहुत सारे कनेक्शन अन्य कम्पनियों को चले जाएंगे।
15. दूरसंचार से संबंधित मामलों मे वर्ष 2011 की चरम स्थिति सितम्बर के महीने में आएगी जब गुरू वक्री चल रहे होंगे और शुक्र अस्त चल रहे होंगे और उस समय विपक्षी दलों को एक के बाद एक कई और मुद्दे मिल जाएंगे। केन्द्र सरकार के लिए यह समय बिल्कुल भी अच्छा नहीं होगा क्योंकि भारत की जन्मपत्रिका के चौथे भाव में कई ग्रहों का प्रभाव चल रहा होगा।
16. भारत का सकल राष्ट्रीय उत्पादन शानदार होते हुए भी खाद्यान्न के भावों मे ऊंच-नीच चलती रहेगी। 2011 के ही अंतिम त्रैमास में इन सबका असर देखने को मिलेगा। उस समय मंहगाई को लेकर भयंकर अखबारबाजी और जनता के आंदोलन देखने को मिलेंगे। अखबारों को खुलकर लिखने का अवसर मिलेगा और ऎसा लगेगा कि प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर जैसे सरकार का नियंत्रण ही नहीं रहा हो।
17. वक्री बृहस्पति की अवधि में ही अर्थात् अगस्त के अंतिम सप्ताह से लेकर 26दिसम्बर तक की अवधि में कुछ स्कैण्डल्स खुलकर सामने आएंगे जिनमें कम से कम दो बाबाओं के नकाब उतारने की चेष्टा की जाएगी। नवम्बर-दिसम्बर का महीना तो विशेष हलचल वाला रहेगा जब बृहस्पति, बुध दोनों वक्री होंगे और बृहस्पति से षडाष्टक बना रहे होंगे। इस समय देश की राजनीति में अभूतपूर्व हलचल चल रही होगी। मंहगाई पर सरकार का नियंत्रण नहीं रहेगा और घोटाले ही घोटलों की खबरें अखबारों मे छाई रहेंगी।
18. 2011 के उत्तरार्द्ध में भारतीय अंतरिक्ष संगठन अद्भुत कार्य करेगा और उनके किए गए प्रक्षेपणों और वैज्ञानिक शोध के कारण भारत संसार के अग्रणी देशों मे आ चुका होगा। हमने पिछले वर्ष लिखा था कि भारत अंतरिक्ष प्रक्षेपणों में करो़डों डॉलर कमाएगा। यह भविष्यवाणी सच जा रही है और 2011 में इसकी पराकाष्ठा होगी।
19. केन्द्र सरकार को चलाने वाले लोगों में गंभीर मतभेद होने के लक्षण दिख रहे हैं। कांग्रेस पार्टी की अंदरूनी कलह सतह पर आने में ग्रह स्थिति मदद करेगी। नवम्बर 2011 के अंतिम सप्ताह से लेकर दिसम्बर के अंत तक भारतीय राजनीति के कई काले अध्याय लिखे जाएंगे। संसद के शीतकालीन अधिवेशन में इतने हंगामे देखने को मिलेंगे जिसका असर प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में वर्ष के अंत तक देखने को मिलेगा।
20. यूपीए सरकार के आंतरिक मतभेद चरम सीमा पर होंगे और इससे सरकार पर संकट बढ़ने ही वाला है। श्रीमती सोनिया गांधी पर कुछ व्यक्तिगत आक्षेप भी किए जाएंगे।

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